
डॉ. बाबासाहेब एक दीप
उजियारा बनकर आया
गरीबी, भेद, अपमान चखा
पर मन न कभी घबराया…….१
ज्ञान ही जीवन का आयुध है
यह उसने था ठाना
छोटे से गाँव का बालक
आगे जग को था बतलाना…..२
लंदन, कोलंबिया की गलियों
में प्रतिभा निखरती जाती
भारत के वंचित जन के
मन में आशा की किरण जगाती…….३
अस्पृश्यता की जंजीरों को
तोड़ने की ठानी आस
समता, मानवाधिकारों
रचा उन्होंने इतिहास …..४
अन्याय, अत्याचार विषमता
सबका अंत हो जाए
भारत का संविधान बने
जो जन-जन के मन भाए…..५
स्त्री-शिक्षा, समान हक़
नवजागरण की ज्योति
आधी आबादी को अधिकार
देने की बढ़ाई ज्योति…..६
बाल-विवाह, रूढ़ियाँ,
कुरीतियों पर किया प्रहार
न्याय और समता पर
आधारित दिया नया विचर …..७
सत्य-अहिंसा के पथ पर
चलकर चुना नया उजियारा
दुर्गम राहों में भी देखा उन्होंने
नवजीवन का तारा……८
मानवता, करुणा, बंधुता
संदेश जग में फैलाया
भेदभाव की राख से उठकर
नया दौर जगमगाया ……९
सौ. सुनिता कोठावदे पिंपळनेर














