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प्रबोधिनी मंच महाराष्ट्र साहित्य समूह तर्फे विशेष कविता – राष्ट्रसंत गाडगेबाबा

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स्वच्छतेने होई | रोगराई दूर|
संदेश स्विकार | बहूमोल ||१||

घेऊन खराटा |गाडगे सोबती |
कार्य मोठे हाती | स्वछकरी||२||

अज्ञाना महती | शिक्षणाची देती |
शिकून सावरा | जीवनाशी ||३||

कोंबडे बकरे | नवसाला देती |
अघोरी पध्दती | सोडविण्या||४||

समाज जागृती | करण्या किर्तने|
ग्रामी आवडीने| चालविती ||५||

दिन दुबळ्यांची | सेवा करी फार|
तोची एक थोर | जगामध्ये ||६||

शिक्षणाचे खरे | महत्व सांगोनी|
सान थोर मनी | नाही भेद ||७||

संत माऊली ती | जगी प्रगटली |
लेकरा सावली | अनाथांची ||८||

स्वछतेचे दुत | महाराष्ट्रात हे |
गाडगेबाबा हे | राष्ट्रसंत ||९||

सौ.सविता संजय भोयर
राजुरा जिल्हा चंद्रपूर

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