
ओम् अर्हम सा !
प्रणाम सा !
शासन श्री साध्वी श्री मधु रेखा जी की प्रेरणा से बोरावड़ में भावना कोटेचा के 21 की तपस्या पर मेरे भाव-
तपस्या की बेला आयी, मंगल गीत हम सब सुनाएं ।
सुन्दर भावों से श्रद्धा दीप जला, अक्षत तिलक लगाएं ।
मिलजुल तपस्या के गीत हम सब गाएं ।
21 की तपस्या में अब मानों सावन के बादल बरसें
मन के मोर पपैया नाचें बोरावड़ में धरती अम्बर हैं हरसें
हो तपस्वी ! कोयल कूके झूमें दशों दिशायें ।
मिलजुल तपस्या के गीत हम सब गाएं ।
साध्वी श्री जी की प्रेरणा से तपस्या की अलख जागी
मनमन्दिर के झंकृत सुर से मीठी- मीठी वीणा बाजी
हो तपस्वी ! श्रद्धा के सुमनों से तुमको आज बधाएं ।
मिलजुल तपस्या के गीत हम सब गाएं ।
ख़ुशियों का मौसम आया तप का मधुमास लिए
“ भावना “ के तप की सौरभ फैली विश्वास लिए
हो तपस्वी ! तपस्या के आँगन में हमारे पाप घुल जाएं ।
मिलजुल तपस्या के गीत हम सब गाएं ।
गौरवशाली संघ हमारा नभ में चमकेगा ध्रुव तारा
युगों युगों तक तपस्या से विकसेगा शासन प्यारा
हो तपस्वी ! तपस्या की सौरभ पा हम भाग्य सराएं ।
मिलजुल तपस्या के गीत हम सब गाएं ।
तपस्या की बेला आयी, मंगल गीत हम सब सुनाएं ।
सुन्दर भावों से श्रद्धा दीप जला, अक्षत तिलक लगाएं ।
मिलजुल तपस्या के गीत हम सब गाएं ।
ओम अर्हम सा !
प्रदीप छाजेड़
(बोरावड़)
(8-9-2025)










