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प्रबोधिनी मंच महाराष्ट्र समूह तर्फे आजची कविता – रिश्ता तेरा मेरा

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रिश्ता तेरा मेरा
कितना अजीब है
ना मिल सकते हैं
ना पास आ सकते हैं….1

जाओ कहीं भी तुम
जाए कहीं भी हम
ना जाएगा दिल से
यह मोहब्बत का गम….2

खुशबू की तरह तुम
दिल में बस गए हो
रहते कहीं हो लेकिन
महकते मेरे दिल में हो….3

मूरत तेरी मन में
उस भगवान जैसी है
अंधेरे मेरे मन में
उजाले जैसी है….4

कवयित्री सौ.वैजयंती विकास गहुकर
योगा टीचर व कवयित्री
जिल्हा. चंद्रपूर

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