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प्रबोधिनी मंच महाराष्ट्र साहित्य समूह तर्फे विशेष कविता – अभंग

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वाटेवरी होती | अत्याचार रोज |
महालात भोज | आनंदाने ||१||

कठीण जाहल्या | जगण्याच्या वाटा |
न्याय उफराटा | सदोदित ||२||

नित्याचेच झाले | नारीचे शोषण |
गुन्ह्याचे पोषण | न्यायालयी ||३||

डोईवर सारा | महागाई भार |
बंद झाले द्वार | उत्कर्षाचे ||४||

पाणी आले डोळा | झाली अतिवृष्टी |
जगण्याची सृष्टी | खालावली ||५||

दुष्काळ टंचाई | घशाला कोरड |
अबोल ओरड | कोण ऐके ||६||

शेती बांधावर | बळीचाच बळी |
राजकीय खेळी | नित्याचीच ||७||

घेऊनी शिक्षण | नाही काम हाती |
जगण्याच्या वाती | विझलेल्या ||८||

अराजक जिथे | न्याय कुठे मागू |
व्यथा कुणा सांगू | ‘रवि’ तुझ्या ||९||

रवि ताकसांडे
गडचांदुर जि. चंद्रपूर

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