
वाटेवरी होती | अत्याचार रोज |
महालात भोज | आनंदाने ||१||
कठीण जाहल्या | जगण्याच्या वाटा |
न्याय उफराटा | सदोदित ||२||
नित्याचेच झाले | नारीचे शोषण |
गुन्ह्याचे पोषण | न्यायालयी ||३||
डोईवर सारा | महागाई भार |
बंद झाले द्वार | उत्कर्षाचे ||४||
पाणी आले डोळा | झाली अतिवृष्टी |
जगण्याची सृष्टी | खालावली ||५||
दुष्काळ टंचाई | घशाला कोरड |
अबोल ओरड | कोण ऐके ||६||
शेती बांधावर | बळीचाच बळी |
राजकीय खेळी | नित्याचीच ||७||
घेऊनी शिक्षण | नाही काम हाती |
जगण्याच्या वाती | विझलेल्या ||८||
अराजक जिथे | न्याय कुठे मागू |
व्यथा कुणा सांगू | ‘रवि’ तुझ्या ||९||
रवि ताकसांडे
गडचांदुर जि. चंद्रपूर















