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राष्ट्रीय खेल दिवस पर शिव छत्रपती पुरस्कार विजेता का अपमान, अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी का हुआ अनादर

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प्रशांत रामटेके संपादक – हर वर्ष 29 अगस्त को राष्ट्रीय खेल दिवस हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की स्मृति में मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य महान खिलाड़ी को सम्मान देने के साथ-साथ देश में खेल और खिलाड़ियों को बढ़ावा देना है।

लेकिन राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर चंद्रपुर जिला क्रीडा कार्यालय की ओर से अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी एवं शिव छत्रपती पुरस्कार विजेता का एक बार फिर गहरा अपमान किया गया। चंद्रपुर के पहले शिव छत्रपती पुरस्कार विजेता खिलाड़ी कुंदन नायडू और उनके छोटे भाई शिवछत्रपती पुरस्कार विजेता तथा अंतरराष्ट्रीय स्वर्ण पदक विजेता खिलाड़ी राजेश नायडू को अतिथि के रूप में जिला स्टेडियम में आमंत्रित किया गया था।

किन्तु उन्हें आमंत्रित करने का तरीका बेहद अपमानजनक रहा। निमंत्रण पत्र केवल एक रात पहले भेजा गया और उसमें दोनों भाइयों के कार्यक्रम का समय अलग-अलग दर्शाए गए। यही नहीं, यह पत्र कार्यालय के एक चपरासी के माध्यम से उन्हें भी भेजा गया। उसी चपरासी से फोन पर भी आमंत्रण करवाया गया। यह बात बुरी नहीं है कि एक चपरासी के माध्यम से बुलावा भेजा गया, क्योंकि वह स्वयं एक अच्छे स्तर का एथलेटिक खिलाड़ी है, परंतु उसके बाद न तो किसी ने व्यक्तिगत रूप से संपर्क किया और न ही कोई सम्मानजनक व्यवहार किया गया।

इसके बावजूद राजेश नायडू समय पर जिला स्टेडियम पहुँचे और अपनी उपस्थिति दर्ज की। लेकिन वहाँ न तो उन्हें लेने कोई आया और न ही यह बताने कि कार्यक्रम कहाँ हो रहा है। उन्हें स्वयं खोजते हुए बैडमिंटन स्टेडियम पहुँचना पड़ा, जहाँ कोई कार्यक्रम दिखाई नहीं दिया। इससे खिन्न होकर उन्होंने मंत्री के समक्ष अपनी नाराज़गी व्यक्त करने की बात की है।

उसी दिन राजेश नायडू को सरदार पटेल महाविद्यालय में मुख्य अतिथि के रूप में भी आमंत्रित किया गया था। वहाँ से लगातार चार दिनों तक कॉलेज प्रशासन स्वयं उन्हें फोन कर सम्मानपूर्वक आमंत्रित करता रहा।

राजेश नायडू का आरोप है कि सरकारी अधिकारी और कर्मचारी खेल से जुड़ी जिम्मेदारियों को छोड़कर अन्य कार्यों और भ्रष्टाचार में लगे हुए हैं। जब वे जिले के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों और शिव छत्रपती पुरस्कार विजेताओं को सम्मान नहीं दे पा रहे, तो अन्य खिलाड़ियों के साथ उनके व्यवहार का अंदाज़ा लगाया जा सकता है।

इसी कारण राजेश नायडू ने जिला अधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि किशोर जोरगेवार, संसद प्रतिनिधि प्रतिभाताई धानोरकर और राज्य के मुख्यमंत्री से शिकायत करने की बात कही है।

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