
चिं. प्रशांत जिनका नाम है!
आज इनका अवतरण दिवस है!
महासागर से भी गहरा इनका
साहित्य है!
हर कोई इनके साहित्य रूपी महासागर में डुबकी लगाने केलिए तैयार है!
आपकी कल्पना शक्ति उड़ान भरती रहे!
आपकी कलम
कभी खाली न रहे!
आपकी लेखनी सृजनता का विकास करती रहे!
जीवन में आपको असीम सफलता मिलती रहे!
सभी आपको” चिरंजीव भव”३
कहते रहे!
इस जन्म दिवस पर आपको
सौ साल तक ड्रायविंग करने की ताक़त मिले!
यूंही आप मस्त रहे! स्वस्थ रहें!
कुशल रहे! चिंता से मुक्त रहे!
व्याधा -बाधा संकट मिटे!
और कटे दु:ख सारे!
विमुख जनों के तेवर बदले!
हर मंच पर हम जैसे
मधुर मित्र आपको मिले!
पत्र कारिता के माध्यम से आपने गरीबों को न्याय दिलाया हैं!
समाज के हर पक्षके विभिन्न तत्वों को न्याय दिलाने के वास्ते कड़ी मेहनत दिखाया है!
जय ज्योति जय सावता जय क्रांती की अद्भुत प्रेरणा से ज्ञान ज्योति की मशाल जलायी हैं!
किस तरह आपको शुक्रिया कहे आपने हम सभी कवियों को लेखकों को पोर्टल के माध्यम से एक विशिष्ट पहचान दिलायी है!
आपके पुरस्कार की घोषणा जबसे की गयी है!
हम सभी उल्लासित व प्रफुल्लित हो रहे हैं !
समाज राजनीति और साहित्य के प्रति ऐसे ही अदि्वतीय कार्य करते रहे!
आपको सम्मान मिलता रहे,
हम हमेशा आपके पुरस्कार के लिए तालियां बजाने के वास्ते तत्पर हो रहे हैं! और आज हम आपको गर्व से कह रहे हैं … चिरंजीव भव! चिरंजीव भव! चिरंजीव भव!
सौ. अनुराधा मारचट्टीवार हैदराबाद तेलंगाना















