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प्रबोधिनी मंच महाराष्ट्र समुह तर्फे विशेष कविता – नारी शक्ति

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नारी घर की रौनक है
नारी से ही घर में शांति है
नारी से ही आत्म विश्वास है
नारी परिवार की शक्ति है
नारी दिव्य आभा सी भक्ती है
नारी उपहास की पात्र नहीं
व्यंग्यबाण की शिकार नहीं
नारी हर घर में पूजा की देवी है
नारी हर घर में माया की मूर्ति है
नारी तुम्हीं हो मेरी भारत मातृभूमि
नारी तुम्हीं से मेरी सृजन सृष्टि सारी
नारी शक्ति रुप में काली दुर्गा
नारी भक्ती रूप में पूजनीय है
नारी शिकन रूप मे किलकारी है
नारी अब की बेटी रूप में हमारी राज दुलारी है
नारी तू सब तोड बेड़ियां
स्वछंद गगन अब उड़ना है
नारी तू छोड़के झुठे रीत रिवाज
घुंघट से लेकर अंध विश्वास सभी को मुंह तोड ज्वाब देना है।
नारी तुम बाल उपवन की माली हो;
नारी तुम्हीं से ही इतिहास गवाह है
कि तुम अद्भुत गौरवशाली हो.
नारी तुम आदिकाल से वर्तमान तक विजयी परचम की अधिकारी हो;
नारी तुम दु:ख सुख की सहभागी हों।
नारी तुम्हीं हमारी जन्म जननी हो
नारी तुम्हीं से हमारी दुनिया रोशन,
नारी तुम्हीं से हृदय में श्वास प्रणेता
नारी तुम्हीं उर क्षेत्र में ममता मय दानी हो।

सौ अनुराधा लक्ष्मण मारचट्टीवार
हैदराबाद तेलंगाना।

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