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आजची कविता – सिर्फ १०० ग्राम

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वजन तो बहुत भारी है
व्यवस्था झेल न पायेगी
विनेश का जितना
देख न पाएंगी

खेल तो होते रहेगा
हार जीत तो तय है
जित का जश्न हो जाएगा
पर देखो १०० ग्राम भारी है

ख़बरें देखो
गालियों की बरसात तो हो रही है
चर्चा करो, सिर्फ १०० ग्राम क्या हे देखो
व्यवस्थाने जो किया सो किया ही है

खेल का माहोल है
अब विनेश हार गई है
व्यवस्था जित गई है
अब रोना सिर्फ रोना नहीं है

मैदान में उतरना आसान नहीं है
हारना आसान नहीं है
ढोंगी व्यवस्था को जगाना आसान नहीं है
इसलिए शायद १०० ग्राम भारी है

कवियत्री -रेश्मा सावित्री गंगाराम आरोटे

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